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भारत 2050

स्थायी समृद्धि की योजना

क्या भारत 2050 में उच्च-आय वाले देश का दर्जा प्राप्त कर सकता है?

क्या देश में मानव विकास की स्थिति बेहतर होगी?

यह पुस्तक संचार, व्यापार सेवाओं, स्वास्थ्य, शिक्षा, शोध और नवप्रवर्तनों के नेतृत्व में व्यापार-उन्मुख सेवा क्षेत्र की केंद्रीयता पर बल देती है। पुस्तक यह भी तर्क देती है कि, समग्रता, आर्थिक विवेक और निम्नस्तरीय-कार्बन जीवन शैली दीर्घकालीन विकास की पूर्वापेक्षा है।

  • राजदूत श्याम सरन द्वारा प्राक्कथन
  • प्रस्तावना
  • आभार
  • परिचय
  • 21वीं शताब्दी में अंतर्राष्ट्रीय आय में अंतर को समाप्त करना
  • भारत की विकास गाथाः आत्मविश्वास का आधार परंतु मार्ग सुधार की आवश्यकता
  • संवहनीय समृद्धि के लिए एक नया प्रतिमान
  • विकास की संभावनाएं: मंदी का परिदृश्य एवं उपयुक्त परिदृश्य
  • संवहनीय आर्थिक समृद्धि हेतु निर्यातोन्मुख ज्ञान अर्थव्यवस्था
  • समृद्धि की सामाजिक संवहनीयता को सुनिश्चित करना
  • वित्तीय रूप से संवहनीय संसाधन जुटाना
  • समृद्धि को पारिस्थितिकीय रूप से संवहनीय बनाना
  • समृद्ध भारत 2050 में विकेन्द्रीकृत ज्ञान-केन्द्रित शहरों की ओर
  • सार्वजनिक कल्याण उपलब्ध कराने हेतु सरकार को अपने कर्तव्यपालन के लिए बाध्य करना
  • कुछ अति-महत्वपूर्ण सिद्धांत
  • दोराहे पर भारत
रामगोपाल अग्रवाल

रामगोपाल अग्रवाल वर्तमान में एक गैर-सरकारी संगठन ‘पहले इंडिया फाउण्डेशन’ के चेयरमैन हैं, जिसका प्रचार वाक्य हैः भारत को सर्वप्रथम बनाने हेतु भारत को आगे रखा जाना। साथ ही वे नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च, नई दिल्ली के वरिष्ठ सदस्य हैं। वे यूनेस्कैप (यूएनईएससीएपी) कार्यालय, नई दिल्ली से बतौर सलाहकार जुड़े हुए हैं। वे रिसर्च एंड इन्फार्मेशन ... अधिक पढ़ें

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