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मृत्यु कष्टदायी न थी

1971 युद्ध की भारतीय फ़ाइटर पायलट्स की आपबीती कथाएँ

यह किताब उस पूर्व भारतीय फ़ाइटर पायलट के अनुभवों का सच्चा वृतांत है, जिसे 1971 भारत-पाक/ बांग्लादेश लिबरेशन वॉर के दौरान क़ैदी बनाया गया था। यह किताब युद्ध के दौरान फ़ाइटर पायलट्स के साहसिक जीवन का वर्णन तो करती ही है, साथ ही इसका आत्मविश्लेषी पहलू भी है, जहां युद्ध की भयावह हक़ीकतों पर सैनिक की प्रतिक्रियाएं नज़र आती हैं। युद्ध के क़ैदी के अनुभवों को बारीकी से पेश किया गया है, और मृत्यु, विरक्ति, अकेलापन व दुःख जैसे युद्ध के भाव हमसे साझा होते जाते हैं। दिल को छूने वाले किस्सों और पाकिस्तानी जाँच अधिकारियों, संतरियों, जेलर और नागरिकों की बातचीत के हिस्सों के ज़रिये, यह किताब आसमान में चलने वाले भौतिक युद्ध और दो देशों के मन में चलते द्वंद की तुलना बखूबी पेश करती है।

  • मृत्यु कष्टदायी न थी
  • करुणा और क्रूरता
  • गोपनीयता और जासूसी
  • अस्पताल और इलाज
  • कुछ ग़लतफ़हमियाँ, कुछ ख़ुशफ़हमियाँ
  • अपने लोग, अपने साथी
  • एक अमरीकी मेहमान
  • कुछ हँसी, कुछ मज़ाक
  • साहस और कायरता
  • दिलेरी और शैतानी
  • काला सन्धू
  • वह समय ही ख़राब था
  • पिंजड़े में बन्द शेर
  • स्वच्छंदता की पुकार
  • तैयारियां और शंकाएं
  • पलायन
  • प्रतिक्रिया
  • पाप की कमाई
  • आयशा
  • वापस अपने देश
धीरेन्द्र एस. जफ़ा

धीरेंद्र सिंह जफ़ा, विंग कमांडर (रिटा.) भारतीय वायुसेना को 1971 में हुई लड़ाई के दौरान पाकिस्तान में युद्धबन्दी बनाया गया था। रणभूमि में उनके साहस के लिए उन्हें वीर चक्र से नवाज़ा गया।

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