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कौन धोखा देता है और कैसे?

घोटाले, धोखाधड़ी और कॉर्पोरेट दुनिया का स्याह पक्ष

  • रॉबिन बनर्जी - चार्टर्ड अकौंटंट, कॉस्ट अँड मॅनेजमेंट अकौंटंट, कंपनी सेक्रेटरी

अच्छी कमाई कर रहे कॉर्पोरेट धोखा क्यों देते हैं?

ये घोटाले और धोखे कैसे किए जाते हैं?

कॉर्पोरेट अपनी उस प्रतिष्ठा को दांव पर क्यों लगा देते हैं, जिसे उन्होंने वर्षों में बनाया है?

यह किताब इन सवालों और कॉर्पोरेट जगत के अब तक के अनछुए रहे पहलुओं की पड़ताल करती है।

यह किताब उन सामान्य पाठकों के लिए भ्रम दूर करने वाली साबित होगी, जिन्हें पता चलेगा कि कई कॉर्पोरेशन, जिन्हें वे सम्मान की दृष्टि से देखते हैं, दरअसल धोखेबाज हैं। इस किताब से पाठक इसलिए भी जुड़ेंगे क्योंकि इसमें उल्लिखित ज्यादातर मामले पिछले एक-डेढ़ दशक में ही सामने आए हैं। बनर्जी का शोध विस्तृत है।

-द वीक

साइबर धोखाधड़ी, भेदिया व्यापार, कर-चोरी - ऐसी कंपनियों और एग्जीक्यूटिव के ढेरों उदाहरण हैं, जो व्यापार में शॉर्टकट अपनाने के लालच में उलझ गए। यह किताब ऐसे ही उदाहरणों के माध्यम से इस बारे में बात करती है कि कैसे इन्हें नियंत्रित किया जाए और शेयरधारक अपने हितों की रक्षा के लिए क्या कर सकते हैं।

-द मिंट

  • आभार
  • परिचय
  • घपले और घोटाले: तरकीबें और तरीक
  • कॉर्पोरेट ठग
  • क्या हम अपने बैंकों पर विश्वास कर सकते हैं?
  • जल्द अमीर करने वाली वित्तीय योजनाएँ
  • शेयर बाजार धोखा देता है
  • हमारे वायर्ड विश्व में अपराध
  • लेखा विवरण: धोखाधड़ी एवं रचनात्मकता
  • जाँचकर्ता स्वयं धोखेबाज हो सकते हैं
  • क्या फार्मा कंपनियाँ परवाह करती हैं? क्या दवाएँ उपचार करती हैं? क्या डॉक्टरों को फ़िक्र है?
  • धोखाधड़ी, जिसका अभी खुलासा नहीं हुआ है, उस पर “अंतिम शब्द”
रॉबिन बनर्जी

रॉबिन बनर्जी 20 देशों से ज्यादा की अनेक विशाल बहुराष्ट्रीय कंपनियों में 35 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ पेशेवर कार्यकारी हैं। वे एक चार्टर्ड एकाउंटेंट, कॉस्ट एवं मैनेजमेंट एकाउंटेंट, कंपनी सेक्रेटरी हैं तथा उन्होंने वाणिज्य में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की है। अपने करियर के प्रारंभिक वर्षों में उन्होंने हिंदुस्तान यूनिलीवर में निर्य ... अधिक पढ़ें

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