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भारत का संविधान, वृत्तिक आचारनीति और मानव अधिकार

भारत का संविधान, वृत्तिक आचारनीति और मानव अधिकार भारत के संविधान, मूल मानव अधिकारों और व्यावहारिक वृत्तिक (व्यावसायिक) आचारनीति का व्यापक विहंगावलोकन प्रदान करती है। यह पुस्तक इन विषयों को समझना आसान बनाती है और सबसे कुशल एवं प्रभावशाली ढंग से संविधान से जुड़े उद्देश्यों और निष्कर्षों को सफलतापूर्वक प्राप्त करने में सहायता करती है।

प्रमुख विशेषताएं

  • नवीनतम सुधारों पर आधारित विषय
  • आसानी से समझने और याद करने में सहायता करने के लिए अध्यायों का युक्तिसंगत क्रम
  • अवधारणात्मक स्पष्टता प्रदान करने वाले रेखाचित्रों और तालिकाओं के साथ सुस्पष्ट व्याख्या

  • प्रस्तावना
  • पुस्तक को पढ़ने हेतु दिशा-निर्देश
  • आभारोक्ति

अनुभाग I भारत के संविधान का परिचय

  • संविधान की संकल्पना
  • संविधान का निर्माण
  • संविधान की प्रमुख विशेषताएँ

अनुभाग II संवैधानिक ढांचा

  • भारतीय संविधान की प्रस्तावना  
  • मूल अधिकार और उनकी सीमाएँ
  • राज्य नीति के निदेशक तत्व  
  • मूल कर्तव्य

अनुभाग III संघ विधायिका, राज्य विधानमंडल और भारत में निर्वाचन प्रक्रिया

  • संसद
  • राज्य विधानमंडल
  • भारत में निर्वाचन प्रक्रिया

अनुभाग IV संघ कार्यपालिका और राज्य कार्यपालिका

  • राष्ट्रपति
  • उपराष्ट्रपति
  • राज्यपाल
  • प्रधानमंत्री
  • मुख्यमंत्री
  • संघीय मंत्रिपरिषद
  • राज्य मंत्रिपरिषद
  • भारत के महान्यायवादी और राज्य का महाधिवक्ता

अनुभाग V उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय

  • उच्चतम न्यायालय
  • उच्च न्यायालय

अनुभाग VI स्थानीय शासन और सहकारी समितियाँ

  • भारत में स्थानीय शासन: पंचायत और नगर पालिकाएँ
  • सहकारी समितियाँ

अनुभाग VII संविधान के संशोधन और आपातकालीन प्रावधान

  • संविधान में संशोधन और महत्वपूर्ण संशोधन (42वाँ, 44वाँ, 74वाँ, 76वाँ, 86वाँ और 91वाँ)
  • आपातकालीन प्रावधान

अनुभाग VIII समाज के कमजोर वर्ग के लिए संवैधानिक प्रावधान

  • अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अन्य पिछड़े वर्गों, महिलाओं और बच्चों हेतु विशेष उपबंध

अनुभाग IX मानव अधिकार

  • मानव अधिकार: अर्थ, परिभाषाएँ और विशिष्ट मुद्दे
  • मानव अधिकार: विधि निर्माण और राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग

अनुभाग X अभियांत्रिकीय नीति

  • अभियांत्रिकीय नीति का कार्यक्षेत्र और प्रयोजन
  • इंजीनियरों के उत्तरदायित्व और उत्तरदायित्वों की बाधाएं
  • जोखिम, सुरक्षा और इंजीनियरों की जवाबदेही
  • अभियांत्रिकी में ईमानदारी, निष्ठा और विश्वसनीयता
  • परिशिष्ट I: संघ, राज्य और समवर्ती सूची की विषय-वस्तु
  • परिशिष्ट II: श्रेणी अनुक्रम
प्रवीणकुमार मेल्लल्ली

प्रवीणकुमार मेल्लल्ली ने वर्ष 2008 में कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ से बी.एससी (पीसीएम) की उपाधि प्राप्त की। अपने परिवेश की सामाजिक-आर्थिक समस्याओं ने उन्हें लोक सेवक बनने के लिए प्रेरित किया, जिसके लिए उन्होंने वर्ष 2012 में कर्नाटक राज्य विश्वविद्यालय, मैसूर से लोक प्रशासन विषय में एमए की उपाधि प्राप्त की। हालांकि वे लोक सेवक बनने में सफल नहीं ... अधिक पढ़ें

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