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अनमोल बेटियां

पहली पीढ़ी की पेशेवर महिलाएं

यह पुस्तक उच्च शिक्षा और नौकरी के लिए पारंपरिक भूमिका से बाहर आकर बदलाव ला रही शहरों की युवा महिलाओं की करियर के लिए महत्वाकांक्षा के विस्तार का अध्ययन करती है।

यह जनसांख्यिकीय, शैक्षिक, सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक बदलावों का विश्वलेषण करती है। महिलाओं और उनके परिवारों की कहानी का प्रयोग कर पुस्तक उन बेटियों के आत्म के नये भावों को प्रस्तुत करती है, जिनकी मांओं का कभी स्वयं का पेशेवर जीवन नहीं रहा।

इन युवा रोज़गार-उन्मुख महिलाओं के अपने समाज और दुनिया से जुड़ने के तरीकों पर ध्यान केंद्रित करते हुए यह पुस्तक इस बात का अन्वेषण करती है कि वे अपनी पारंपरिक भूमिका को कैसे देखती हैं और समाज उन्हें कैसे देखता है।

  • आभार
  • पारस्परिक बदलाव
  • पुरुषों के बीच महिलाओं का इतिहास
  • लिंग और जनसांख्यिकी: विरोधाभासी प्रभाव
  • शहरों में पेशेवर आकांक्षाएं और शिक्षा
  • पिता-बेटी परियोजना में स्तर का बढ़ना
  • एक नए लिंग युग में शिक्षित अभिजात वर्ग
  • सन्निहित एजेंसी: लाभ, हानियाँ, और अजन्मी आशाएं
  • सामाजिक पुनरोत्पादन और पेशेवर कल्पनाएं
  • लिंग को लेकर सोच में बदलाव की ओर
एलिस डब्ल्यू. क्लार्क

एलिस डब्ल्यू . क्लार्क एक इतिहासकार और भारत में लिंग और समाज की विद्वान हैं, जिन्होंने सांता क्लारा विश्वविद्यालय समेत सैन फ्रांसिस्को बे एरिया के अनेक विश्वविद्यालयों में इतिहास और महिला अध्ययन के बारे में पढ़ाया है। वे यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया-बर्कले एक्सटेंशन ऑनलाइन के लिए “भारत की संस्कृति” पर प्रशिक्षक भी रही हैं। विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय स ... अधिक पढ़ें

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